HIGHLIGHTS NEWS NETWORK: राज्य की बिजली कंपनियां और निगम पहले ही कह चुके हैं कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना आत्मनिर्भर योजना है। इस तरह अगर 3 करोड़ उपभोक्ताओं को 40 रुपये प्रति मीटर का फायदा जोड़ दिया जाए तो हर महीने करीब 120 करोड़ रुपये का फायदा होगा, यानी एक साल में करीब 1500 करोड़ रुपये का फायदा होगा। बिजली कंपनियों ने नियामक आयोग में हलफनामा देकर बताया है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगते ही प्रति मीटर करीब 40 रुपये का फायदा होगा। स्मार्ट प्रीपेड मीटर योजना आत्मनिर्भर योजना है।
राज्य में 3 करोड़ से ज्यादा उपभोक्ता हैं। ऐसे में हर महीने करीब 120 करोड़ रुपये का फायदा होगा। यानी एक साल में करीब 1500 करोड़ रुपये का फायदा होगा। इसी तरह राज्य की सभी बिजली कंपनियां आरडीएसएस योजना के तहत करीब 43454 करोड़ रुपये और बिजनेस प्लान के तहत करीब 5000 करोड़ रुपये का काम कर रही हैं।
बचत में छुपा निजीकरण का सच
ऐसे में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने निजीकरण पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब करोड़ों रुपए से ऐसी ही सुविधाएं विकसित की जा रही हैं और स्मार्ट प्रीपेड मीटर से भी आय होनी है तो फिर ऊर्जा विभाग के अधिकारी लगातार निजीकरण की कोशिश क्यों कर रहे हैं? उन्होंने सवाल उठाया है कि करोड़ों रुपए के संसाधन विकसित करने के बाद क्या निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने की साजिश हो रही है?
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