HIGHLIGHTS EDITORIAL DESK: प्रयागराज में संगम किनारे बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ओर से हनुमंत कथा साल 2025 के जनवरी और फरवरी में लगे महाकुंभ मेले के बाद अप्रैल 2026 में की गई। बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ओर से हुई हनुमंत कथा में महाकुंभ मेले के दौरान भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे और अप्रैल 2026 में प्रयाग उत्थान समिति के सौजन्य से हुई राष्ट्र हनुमंत कथा में भी करीब 5 लाख लोग पहुंचे। कथा के दौरान श्रद्धालुओं और गणमान्य लोगों को जिन अव्यवस्थाओं और बदसलूकी का सामना इस बार करना पड़ा, वैसा महाकुंभ में सामना नहीं करना पड़ा था। इस बार लोग भीषण गर्मी के चलते भी काफी परेशान रहे। साथ ही प्रयाग उत्थान समिति की ओर से लगे कार्यकर्ताओं और बाउंसर्स की वजह से कई लोग कथा में शामिल नहीं हो पाए। कार्यकर्ताओं और बाउंसर्स की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। इसके बाद उनकी कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे है।
वहीं, इस बार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कहे जाने वाले खिलाफ भी पुलिस का मनमाना और अनुचित रवैया सामने आया। किसी भी आयोजन और घटना से जुड़े सभी पक्षों को सामने लाना पत्रकारों का काम होता है। लेकिन, जब साप्ताहिक समाचार पत्र ‘उत्तर प्रदेश हाइलाइट्स’ के संस्थापक संदीप कुमार श्रीवास्तव लोगों के साथ की जा रही बदसलूकी की तस्वीरें अपने मोबाइल में कैद कर चुके थे तो प्रयाग उत्थान समिति के कार्यकर्ताओं और बाउंसर्स के साथ ही पुलिस के आला अधिकारी एसीपी सुनील कुमार सिंह ने भी उनके साथ अभद्रता की। उनका आई कार्ड और मोबाइल छीन लिया। उन्हें नैनी थाने भेज दिया गया। वहां 3 घंटे रखने के दौरान उनके मोबाइल से आयोजन के दौरान हुई घटना के वीडियो और फोटो जबरन डिलीट करवा दिए।
पुलिस की ऐसी कार्यप्रणाली कई सवालों को जन्म देती है। सवाल भारत में पत्रकारों की स्वतंत्रता का भी उठता है। क्या पत्रकारों को पुलिस-प्रशासन के मन के मुताबिक समाचार संकलन और उनका प्रस्तुतीकरण करना होगा ? किसी घटना के दौरान वीडियो और फोटो अपने कैमरे में कैद कर लेना क्या अब अपराध माना जाएगा ? देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के अन्य तीन स्तंभों (विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका) को भी इन सवालों पर विचार करना चाहिए।
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