LUCKNOW ZONE BUREAU: उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक विद्यालयों के अधिनियम के द्वारा दाखिले को लेकर चल रही सख्ती के बीच बेसिक शिक्षा विभाग अब निजी स्कूलों पर और सख्ती बढ़ा रहा है। जिससे निजी स्कूलों की ओर से ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री आईडी बनाने पर भी रोक लगेगी। इसके साथ ही विभाग अब अपार आईडी से आरटीई की फीस की प्रतिपूर्ति करेगा।
अपार आईडी बनाने के लिए प्रदेश में अभियान चल रहा है। सरकारी स्कूलों में 90 फीसदी से अधिक छात्र-छात्राओं ने अपार आईडी बनवा ली है, लेकिन निजी स्कूलों में यह आंकड़ा 50 से 60 फीसदी तक भी नहीं पहुंच पाया है। इसके लिए विभाग ने कई बार निर्देश दिए और कैंप भी लगाए, लेकिन इसमें अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
आवेदन लेकर प्रवेश प्रक्रिया हुआ पूरा
नए सत्र के लिए चार चरणों में आवेदन लेकर प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। इसमें 3.34 लाख आवेदन प्राप्त हुए और 1.85 लाख से अधिक बच्चों को सीटें आवंटित की जा चुकी हैं।
बता दें कि शिक्षा विभाग की तरफ से जारी डेटा के मुताबिक कानपुर नगर में अभी तक 73.36 फीसदी छात्रों का अपार आईडी बनाना है। इसके साथ ही आगरा 63.57 फीसदी, गाजीपुर में 62.16 फीसदी, बलिया में 61.5 फीसदी,मुरादाबाद में 62.71 फीसदी, मेरठ में 62.30 फीसदी आजमगढ़ में 60.49 फीसदी,और फिरोजाबाद में 60.33 फीसदी छात्रों का अपार आईडी बनाने वाली है।
आरटीई पोर्टल हुआ विकसित
निजी स्कूलों को आरटीई के तहत प्रवेशित बच्चों की उपस्थिति भी निर्धारित पोर्टल पर अपडेट करनी होगी। बेसिक शिक्षा विभाग ने आरटीई पोर्टल विकसित किया है। इससे निजी स्कूलों को जोड़ा गया है। उन्हें आईडी-पासवर्ड भी दिया जा रहा है। अब हर दिन बच्चों की उपस्थिति इस पोर्टल पर अपलोड करनी होगी, ताकि पता चल सके कि आरटीई के तहत प्रवेशित बच्चे नियमित रूप से स्कूल आ रहे हैं या नहीं।
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