CM Abhyudaya Scheme : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग योजना’ से यूपीएससी 2024 में 13 छात्रों ने सफलता प्राप्त की और प्रदेश का नाम रोशन किया है। यह योजना गरीब और वंचित वर्ग के छात्रों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान कर रही है। लखनऊ सेंटर से 4 और प्रयागराज से 2 अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की। इसके अलावा हापुड़, बरेली समेत कई जिलों के छात्र शामिल हैं। बता दें कि यूपी में इस योजना से गरीब वंचित वर्ग को यूपीएससी की तैयारी के लिए शिक्षा देना मील का पत्थर साबित हो रही है। मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग योजना से छात्रों के लिए उच्च शिक्षा और फ्री कोचिंग के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।
यूपीएससी 2024 में इन होनहारों ने प्रदेश का किया नाम रोशन
प्रदेश के सभी 75 जिलों में अभ्युदय कोचिंग के 166 सेंटर्स संचालित हैं। इस साल अभ्युदय योजना से पढ़ाई कर रहे हापुड़ के शगुन कुमार ने 100वीं रैंक हासिल की है। जबकि मयंक बाजपेई (सीतापुर) को 149वीं रैंक मिली। आयुष जायसवाल (बरेली) ने 178वीं और अदिति दुबे (लखनऊ) ने 180वीं रैंक के साथ सफलता हासिल की। सौम्या शर्मा (प्रतापगढ़) ने 218वीं रैंक, प्रतीक मिश्रा (प्रयागराज) ने 234वीं और आंचल आनंद (गौतमबुद्ध नगर) ने 399वीं रैंक प्राप्त कर प्रदेश का नाम रोशन किया। वहीं अश्वनी शुक्ला (जालौन) ने 423वीं, उदित कुमार सिंह (प्रयागराज) ने 668वीं, दिशा द्विवेदी (लखनऊ) ने 672वीं, मनीष कुमार (लखनऊ) ने 748वीं, हिमांशु मोहन (अयोध्या) ने 821वीं तथा नैन्सी सिंह (लखनऊ) ने 970वीं रैंक हासिल कर मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना की सफलता को नई उड़ान दी।
कोरोना वायरस के दौरान की गई थी अभ्युदय कोचिंग योजना की शुरुआत
योगी सरकार की अभ्युदय कोचिंग योजना की शुरुआत 2021 में कोरोना वायरस के दौरान की गई थी। ताकि, आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी छात्र भी आईएएस, पीसीएस और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकें। राज्य के प्रत्येक जिले में कोचिंग सेंटर खोले गए हैं, जहां अनुभवी शिक्षक बच्चों को मुफ्त में तैयारी करवा रहे हैं।
समाज कल्याण विभाग के निदेशक ने जाहिर की ख़ुशी
अभ्युदय योजना की इस सफलता पर समाज कल्याण विभाग के निदेशक कुमार प्रशांत ने ख़ुशी जाहिर करते हुए सभी चयनित अभ्यर्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना का उद्देश्य प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर और दूर-दराज के प्रतिभाशाली युवाओं को वही अवसर मिले जो बड़े शहरों में उपलब्ध होते हैं। 13 बच्चों का यूपीएससी परीक्षा में चयन होना इस बात का प्रमाण देता हैं कि यदि सही मार्गदर्शन मिले और संसाधन उपलब्ध हो तो फिर मज़िल दूर नहीं।
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