HIGHLIGHTS NEWS NETWORK: दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित और प्रभावशाली अख़बारों में शुमार वॉशिंगटन पोस्ट की एक हफ्ते पहले की खबर ने दुनिया में हलचल मचा दी। खबर ये कि अख़बार ने कुल स्टाफ के लगभग एक-तिहाई, यानी 300 से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया है। इस फैसले ने न सिर्फ अमेरिकी मीडिया जगत बल्कि वैश्विक पत्रकारिता को भी झकझोर कर रख दिया है।


इस बड़ी छंटनी की चपेट में कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बेटे और अख़बार के वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय स्तंभकार ईशान थरूर भी आ गए हैं। ईशान ने अख़बार से अपने अचानक अलग होने पर भावुक प्रतिक्रिया दी और इसे न्यूज़रूम तथा वैश्विक पत्रकारिता के लिए “बेहद दुखद दिन” बताया।


वहीं देश के प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनल एनडीटीवी से भी कुछ ऐसी ही खबरें आ रही हैं जिसने मीडिया मार्केट में गर्माहट पैदा कर दी है। सूत्रों की मानें तो एनडीटीवी में एक बार फिर पत्रकारों की नौकरी जाने का खतरा मंडराने लगा है. करीब 100 पत्रकारों को एक चिट्ठी आई है. इसमें इनपुट, आउटपुट, कैमरा, एमसीआर, पीसीआर डिजिटल टीम सहित कई विभागों के कर्मचारी शामिल हैं. यह सूचना ऐसे वक्त में इन पत्रकारों को दी गई है जब आमतौर पर ये समय अप्रेजल की प्रक्रिया शुरू करने का होता है. लेकिन एनडीटीवी के नए मैनेजमेंट ने लोगों की नौकरी लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

हालांकि कितने लोगों को निकाले जाने का अल्टीमेटम दिया गया है इसकी अधिकारिक कोई पुष्टि नहीं है लेकिन माना जा रहा है कि इस बार संख्या ज्यादा है. सूत्रों ने बताया कि एचआर विभाग द्वारा कर्मचारियों को ई-मेल भेजे जा रहे हैं, जिसमें कहा जा रहा है कि आपका प्रदर्शन उम्मीद के अनुरूप नहीं है, जिसके कारण टीम और संस्थान के प्रदर्शन पर असर पड़ रहा है. ऐसे में संबंधित कर्मचारी तत्काल अपने एचओडी से बात करें और इस ईमेल को एक चेतावनी समझें. इन कर्मचारियों को डर है कि ये सिर्फ और सिर्फ नौकरी छीनने की कवायद है. ताज्जुब ये है कि इनमें कई कर्मचारी ऐसे हैं जिन्हें पिछले साल अप्रेजल में टॉप रेटिंग मिली थी, लेकिन मैनेजमेंट चेंज होते ही ये लोग टॉप परफॉर्मर से फिसड्डी बना दिए.

सूत्रों के मुताबिक पुराने मैनेजमेंट के लोगों को किनारे लगाने का काम पिछले साल ही जून में शुरू कर दिया गया था. उस वक्त कई पत्रकारों ने एनडीटीवी को बाय-बाय बोलना ज्यादा मुनासिब समझा. जो रह गए उन्हें परेशान किया जाने लगा, लिहाजा कई और लोग न चाहते हुए भी चले गए. कुछ लोगों ने साफ तौर पर बदसलूकी से तंग आकर संस्थान को छोड़ दिया. बाकी जो बच गए उन्हें अब निपटाया जा रहा है. सूत्र बताते हैं इसके पीछे की मुख्य वजह है अपने लोगों को सेट करना. जिन नए लोगों को प्रमुख पदों पर बैठाया गया है उनका व्यवहार भी टीम के साथ अच्छा नहीं है और यही वजह है कि कई पत्रकार तो इसलिए नौकरी छोड़ना चाहते हैं या छोड़ रहें हैं. यहां तक बताया जाता है कि नए और पुराने लोगों में वीक ऑफ तक देने में भेदभाव किया जा रहा है. पुराने, अनुभवी और काबिल लोगों को औना-पौना काम पकड़ा दिया गया है. यही कारण है कि चैनल पर गलतियों की भरमार हो गई है. कुछ वाकये गाली ग्लौच के भी हुए हैं. यही कारण है कि चैनल के अंदर और बाहर दोनों जगह माहौल बहुत खराब है. हर कोई डरा और सहमा हुआ है कि कहीं उसका नंबर ना आ जाए.

जो नए लोग आए हैं वो भी कोई कमाल नहीं दिखा पा रहे. कंपनी का पैसा झोंक देने के बावजूद एनडीटीवी इंडिया की टीआरपी में कुछ खास सुधार नहीं हुआ है. यानी न माया मिली ना राम.
मतलब अरबों की दौलत वाले जेफ बेजोस तो दूसरी तरफ गौतम अडानी ऐसे पत्रकारों की रोजी-रोटी छीनने में जुटे हैं जो बड़ी मुश्किल से अपना घर, बच्चों की पढ़ाई, मां-पिता का खर्च चला पाते हैं। सोचिए अगर इतने पत्रकार बेरोजगार हो जाएंगे तो उनके घरवालों का क्या होगा, खुद उनका क्या होगा।

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By Sandeep Kumar Srivastava

Mr. Sandeep Kumar Srivastava is a media professional and educator. He has more than 15 years of journalistic experience. He was attached with the newsroom of many reputed media houses in BHARAT. He worked as a News Anchor, News Producer and Correspondent. He is very well known for his news and program presentation skills in Television and Digital Media. He is Founder and Editor-In-Chief of UTTAR PRADESH HIGHLIGHTS. E-Mail: tvjournalistsandeepsrivastav@gmail.com

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