HIGHLIGHTS NEWS NETWORK: हिंदू धर्म में इस साल 8 जून से 17 नवंबर तक विवाह नहीं होंगे। 18 नवंबर के बाद विवाह हो सकेंगे, लेकिन शुभ मुहूर्त 21 नवंबर से शुरू होंगे, जो कि 6 दिसंबर तक रहेगा। इस तरह 16 दिन ही विवाह का मुहूर्त रहेगा। इस दौरान भी तीन दिन ऐसे होंगे, जब ग्रहों के सबसे उत्तम संयोग विवाह के लिए होंगे। 22 नवंबर, 29 नवंबर और 30 नवंबर को विवाह के लिए अब इस साल का सबसे अच्छा दिन होगा। बता दें कि इसके पहले इस साल हिंदू नववर्ष शुरू होने के बाद 39 दिन विवाह का मुहूर्त रहा है।

विवाह के लिए होते हैं 12 नक्षत्र
प्रयागराज के गऊघाट स्थित दक्षिणमुखी सिद्धपीठ हनुमान मंदिरॉ के पुजारी राजेंद्र त्रिपाठी ”मधुकर’ ने बताया कि विवाह के लिए 12 नक्षत्र होते हैं। रोहिणी, रेवती, उत्तरा भाद्रपद, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तरा षाढ़ा, मूलम, स्वाति, मृगो, मघा, अनुराधा, हस्त और अश्विनी नक्षत्र में ही विवाह होते हैं। इस साल हिंदू नववर्ष शुरू होने के बाद 13 अप्रैल से 7 जून तक 39 दिन विवाह का शुभ मुहूर्त रहा है। इसके बाद 21 नवंबर से 6 दिसंबर के बीच ही विवाह के शुभ मुहूर्त 16 दिन के लिए हैं। इसमें भी 22-23 नवंबर के दौरान शाम 4 बजे से सुबह 6 बजे तक, 29-30 नवंबर के दौरान रात 1:17 बजे से सुबह 6:32 बजे तक और फिर 29 नवंबर- 1 दिसंबर के दौरान रात 10:29 से रात 12 बजे के साथ ही रात 12:05 से 12:15 तक ही विवाह के लिए सबसे उत्तम समय रहेगा।
8 जून से विवाह कार्य बंद
प्रयागराज के सिविल लाइंस स्थित न्यायविद पवनसुत हनुमान मंंदिर के पुजारी अखिलेश शुक्ला ने बताया कि 11 जून से बृहस्पति ग्रह अस्त हो रहा है। लेकिन, उससे 3 दिन पहले गुरु से वृद्ध होने से 8 जून से विवाह कार्य बंद हो जाएंगे। 7 जुलाई को बृहस्पति ग्रह का उदय होगा। लेकिन, 6 जुलाई को हरिशयनी एकादशी होने से चतुर्मास लग जाएगा। इसके बाद 1 नवंबर को देवउत्थानी एकादशी होगी। हालांकि, शुभ कार्य 18 नवंबर से ही शुरू होंगे। इसके बाद 6 दिसंबर 2025 से 4 फरवरी 2026 तक फिर गुरु अस्त होने से विवाह कार्य नहीं होंगे।
1 नवंबर के बाद होंगे कार्य
ज्योतिषाचार्य दिवाकर त्रिपाठी ने बताया कि विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक कार्य वृहस्पति और शुक्र ग्रह के उदित और शुभ होने पर ही होता है। 11 जून (ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि) को शाम 6:40 बजे के बाद देवगुरु बृहस्पति वृद्धत्व दोष में आ जाएंगे और 7 जुलाई 2025 को दोपहर 3 बजे पूर्व दिशा में उदित होंगे। ऐसी स्थिति में 11 जून से लेकर 3 जुलाई तक विवाह आदि के लिए शुभ मुहूर्त बंद हो रहेंगे। 6 जुलाई (आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि) को हरिशयनी एकादशी के दिन श्रीहरि विष्णु को पूर्ण विधि-विधान के साथ चिर निद्रा में सुलाया जाता है। भगवान विष्णु को चिर निद्रा में चले जाने के कारण भी 4 महीने तक विवाह के लिए शुभ मुहूर्त नहीं मिलते हैं। देवोत्थानी एकादशी के बाद विवाह के लिए शुभ मुहूर्त मिलेंगे। इस तरह 11 जून से 1 नवंबर तक विवाह के लिए लगन नहीं मिलेंगे।
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