HIGHLIGHTS NEWS NETWORK: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के हैदराबाद स्थित चावल अनुसंधान संस्थान आईसीएआर-आईआईआरआर द्वारा विकसित नई जीनोम संपादित चावल की किस्म डीआरआर धान 100 (कमला) पूर्वी भारत के चावल उत्पादक राज्यों पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और ओडिशा के लिए क्रांतिकारी बदलाव लाने जा रही है। धान एक रोपी जाने वाली फसल है, जिसकी खेती के लिए 100 मिमी से अधिक वर्षा और 25-27 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान की आवश्यकता होती है। बीएचयू और आईआरआरआई फिलीपींस के वैज्ञानिकों ने मिलकर इस किस्म को विकसित किया है।
इसका नाम मालवीय मनीला सिंचित चावल-1 है। वैज्ञानिक इस किस्म के बीज तैयार करने की तैयारी कर रहे हैं। बीएचयू और अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान द्वारा तैयार चावल की इस किस्म मालवीय मनीला सिंचित चावल-1 को आईसीएआर ने मंजूरी दे दी है।यह चावल बासमती की तरह लंबे दाने वाला होगा। यह चावल कम समय और कम लागत में तैयार हो जाएगा।
तो आइए एक बार पुराने धान की खेती फसल चक्र पर नजर डालें
वर्षवार धान की खेती
वर्ष : रकबा : उत्पादन : उत्पादकता
2017-18 : 33.07 : 80.93 : 24.47
2018-19 : 31.60 : 61.56 : 19.48
2019-20 : 30.97 : 69.53 : 22.45
2020-21 : 30.21 : 73.92 : 24.47
2021-22 : 30.89 : 71.02 : 22.97 (अनुमानित)
मालवीय मलिना को पानी की कम जरूरत होती है। अगर मानसून सामान्य रहता है, तो सिंचाई की जरूरत नाममात्र की होती है। इससे यह कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए भी आदर्श है। पतले-लंबे और स्वादिष्ट चावल के लिए किसानों को बाजार में अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद है।
इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी। फसल के जल्दी पकने से किसान साल भर खेत में कई फसलें उगा सकते हैं। वे धान-हरी मटर-गेहूं-मूंग, या धान-हरी मटर-सरसों-मूंग, या धान-आलू-मूंग जैसे फसल चक्र को अपनाकर अपनी आय को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं।
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