HIGHLIGHTS NEWS NETWORK: शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) गरीब और वंचित बच्चों को मुफ्त शिक्षा पाने का अवसर प्रदान करता है, लेकिन लखनऊ के कई निजी स्कूल इस कानून की खुलेआम धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। हाल ही में मुरादाबाद की एक लड़की ने RTE के तहत दाखिला न मिलने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दरबार में गुहार लगाई, जिसके बाद सीएम के हस्तक्षेप से उसे महज तीन घंटे में एडमिशन मिल गया। यह घटना लखनऊ और प्रदेश के अन्य इलाकों में व्याप्त समस्या को दर्शाती है।
आपको बता दें कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 भारत में एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कानून है, जिसका प्रमुख उद्देश्य 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करना है। यह अधिनियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21A के अंतर्गत बच्चों को शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि हर बच्चा, चाहे उसकी सामाजिक या आर्थिक स्थिति कुछ भी हो, उसे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। यह कानून बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर और अधिकार प्रदान करता है, जिससे उनका समग्र विकास संभव हो सके।
वहीं लखनऊ में स्थिति चिंताजनक है। आंकड़े बताते हैं कि आरटीई के तहत चयनित 3000 बच्चे अभी भी स्कूल में दाखिले का इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा करीब 2800 बच्चे निजी स्कूलों की मनमानी से निराश होकर दाखिले की उम्मीद छोड़ चुके हैं। जयपुरिया, बाल गाइड, सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (सीएमएस) और विश्वनाथ एकेडमी जैसे नामी स्कूलों पर आरोप है कि वे प्रशासन की बार-बार चेतावनी के बावजूद आरटीई के तहत आने वाले छात्रों को दाखिला देने से इनकार कर रहे हैं।
जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने कई बार नोटिस जारी किए, लेकिन स्कूलों का रवैया जस का तस है। एक जुलाई से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने वाला है, फिर भी हजारों बच्चों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। डीएम द्वारा गठित बीईओ और एसीएम की संयुक्त समितियां भी स्कूलों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सकीं। उन्होंने कहा, “आरटीई के तहत चयनित हर बच्चा स्कूल में दाखिले का हकदार है। अगर कोई स्कूल मनमानी करता है तो उसकी एनओसी रद्द कर दी जाएगी और संबंधित बोर्ड को सूचित किया जाएगा।”
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