HIGHLIGHTS NEWS NETWORK: IIT-BHU वैज्ञानिकों के इलेक्ट्रॉनिक्स ने एक नई तकनीक विकसित की है, जिससे अब बिना इंटरनेट के भी लंबी दूरी तक संदेश और तस्वीरें ली जा सकेंगी। यह खास तकनीक उन जगहों पर काम करेगी, जहां बिल्कुल भी नेटवर्क या इंटरनेट नहीं है और यह बहुत लंबी दूरी तक संचार करने और गैजेट को एडजस्ट करने में सक्षम है। इस सिस्टम को इंडिपेंडेंट एंड सेल्फ-रिलायंट ट्रांसमिशन सिस्टम (एसएसटीएम) नाम दिया गया है।
एसएसटीएम तकनीक का सिग्नल ब्लॉकर्स और कठिन भूगोल सहित एलसीडी में सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। यह तकनीक खास तौर पर रक्षा, सीमा निगरानी, आपदा प्रबंधन और ऑफ-ग्रिड मिशन के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। इसे पोर्टेबल, बुद्धिमान और इंटेलिजेंट संचार समाधान के रूप में विस्तारित करने पर विचार किया जा रहा है।
बिना इंटरनेट के भी काम करेगी
इस शोध कार्य को टीआईआई-यूएई, आईडीएपीटी हब फाउंडेशन और एसईआरबी ने साझा किया है। टीम अब इस तकनीक का इस्तेमाल स्मार्ट ग्राफिक्स, दीवारों, दुर्गम रोम में संचार और भविष्य में अंतरिक्ष से पृथ्वी के संचार में करती है। इसका अगला चरण है – सुरक्षित संचार के लिए एआई-आधारित पथ अनुकूलन और स्मारकों का एकीकरण।
डॉ. हरि प्रभात गुप्ता के अनुसार, यह ज्वालामुखी ज्वालामुखी जाल नेटवर्क को तोड़ता है जो भूगर्भीय संरचना के अनुसार खुद को ढाल लेता है। यह प्रणाली रक्षा क्षेत्र, सीमा निगरानी, सीमा क्षेत्र में संचार और आपदा प्रबंधन के लिए विशेष रूप से उपयुक्त मानी जाती है। इसका उपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा, आपातकालीन बचाव कार्यों और ऑफ-ग्रिड मिशन-आधारित उद्यमों में भी किया जा सकता है।
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